लखनऊ। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक पर बड़ी कार्रवाई की है। कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का प्रस्ताव भेजते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही कंपनी पर जुर्माना लगाने और भविष्य की एनएचएआई परियोजनाओं में उसकी पात्रता प्रभावित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने बताया कि 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के किलोमीटर-64 पर सड़क धंसने की घटना के बाद तत्काल मरम्मत शुरू कराई गई। फिलहाल प्रभावित हिस्से पर यातायात डायवर्ट कर वाहनों का संचालन कराया जा रहा है।
एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी को करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से अपने खर्च पर मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कंपनी की पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स रेटिंग को डाउनग्रेड करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
लापरवाही पाए जाने पर परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया है। तीनों पर दो वर्ष तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल की किसी भी परियोजना में काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं वर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को मूल विभाग भेज दिया गया है और उनके साथ पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया के खिलाफ आरोप-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एनएचएआई ने स्वतंत्र अभियंता कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू करते हुए उसे भविष्य की परियोजनाओं से प्रतिबंधित करने के लिए डिबारमेंट नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है।
पूरे एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता जांच के लिए लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम धंसाव के कारणों की तकनीकी जांच कर सुधारात्मक उपाय सुझाएगी।
एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्से की मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली नहीं की जाएगी। इस अवधि में होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई निर्माण एजेंसी से कराई जाएगी।
