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Thursday, August 13, 2026

असम में उतरने लगा बाढ़ का पानी, लेकिन 9 जिलों की 5.24 लाख आबादी अब भी प्रभावित, मृतकों की संख्या 68 हुई

गुवाहाटी। असम में बाढ़ का पानी भले ही अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं, जबकि घरों, सड़कों और स्कूलों में जमी गाद (कीचड़) ने लोगों के सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDEMA) की रिपोर्ट के अनुसार, चराईदेव जिले में 26 जुलाई को दो और शव बरामद होने के बाद इस साल राज्य में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 68 हो गई है।

9 जिलों के 763 गांव जलमग्न, धनसिरी नदी खतरे के निशान के पार

वर्तमान में राज्य के 9 जिले—चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, होजाई, कामरूप, नगांव, कामरूप (मेट्रो) और डिब्रूगढ़—बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन जिलों के 24 राजस्व मंडलों के 763 गांव पानी में डूबे हुए हैं, जिससे कुल 5,24,733 लोग और 48,742 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई है। इसके साथ ही नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने घोषणा की है कि विधानसभा के बजट सत्र के तुरंत बाद राज्य सरकार के सभी मंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति की समीक्षा करेंगे।

345 शिविरों में जारी है राहत कार्य, भारी संख्या में पशुधन का नुकसान

प्रभावितों को मदद पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से 109 राहत शिविर और 245 राहत वितरण केंद्र (कुल 345 केंद्र) संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में 37,724 लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि 1.53 लाख से अधिक गैर-शिविर निवासियों को राहत सामग्री बांटी जा रही है। बाढ़ के कारण भारी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और करीब 26,512 पशु पानी में बह गए हैं। राहत और बचाव कार्य में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना और पुलिस के साथ-साथ दो हेलीकॉप्टर और 36 नावें तैनात की गई हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रभावित इलाकों में 152 मेडिकल टीमें भी सक्रिय हैं।

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